Connect with us

रोष:गूलर-सालब-बग्वासेरा मोटर मार्ग सिस्टम की लापरवाही से खस्ताहाल, ग्रामीणों में आक्रोश,,

उत्तराखंड

रोष:गूलर-सालब-बग्वासेरा मोटर मार्ग सिस्टम की लापरवाही से खस्ताहाल, ग्रामीणों में आक्रोश,,


गढ़वाल। गूलर-सालब-बग्वासेरा व घेराधार मोटर मार्ग के कछुआ चाल निर्माण में तेजी लाने,सड़क पर डहे पुश्तों की दीवारों को तत्काल लगाए जाने तथा 10 किलोमीटर कटिंग से आगे सालब,बग्वासेरा से घेराधार तक मोटर मार्ग निर्माण को लेकर ऊपली दोगी क्षेत्र के लोग अब जबरदस्त आँदोलन के मूड में दिखाई दे रहे हैं। दरअसल गुलर,सालब,भगवासेरा- से घेराधार तक 25 किलोमीटर दूरी वाला मोटर मार्ग 2002-03 में स्वीकृत हो गया था। हैरत की बात तो ये है कि पिछले 5 वर्षों से हर गांव को 2020-21 तक सड़क से जोड़ने का ढिंढोरा पीटने वाली भाजपा सरकार उक्त सड़क पर कछुआ गति से चलने वाले निर्माण कार्य में तेजी तक नहीं ला पाई है। लगभग 18-19 वर्षों पूर्व स्वीकृत 25 किलोमीटर सड़क अबतक मात्र 10 किलोमीटर की कटिंग के बाद दम तोड़ती नजर आ रही है। जिसको लेकर आंदोलन के लिए बद्धय हो गए हैं।

गौरतलब बात ये है कि उक्त सड़क की प्रारंभिक कटिंग सालब गांव से 300 मीटर पहले ही जंगल व ढंगार के बीच वर्ष 2020 से रुकी पड़ी है। बीच जंगल में रुकी पड़ी उक्त मोटर मार्ग निर्माण को लेकर 18 दिसंबर 2020 को अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले सहायक अभियंता लोनिवि मुनी की रेती कार्यालय पर क्षेत्र के ग्रामीणों ने कामरेड जगदीश कुलियाल व पूर्व प्रधान चतरसिंह भंडारी के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन किया था। आंदोलन के दौरान विभाग के साथ हुए लिखित समझौते के मुताबिक 3 दिनों के भीतर सालब से आगे रोड निर्माण हेतु सर्वे कराए जाने, 10 किलोमीटर की प्रारंभिक कटिंग वाली रोड को और अच्छे से बेहतर करा कर 2 महीनों के भीतर वाहन की आवाजाही को स्वीकृति दिलाने तथा 3 माह में सालब से घेराधार तक वन भूमि को हस्तांतरित करने के साथ रोड निर्माण पर सहमति बनी थी। जिसके बाद ग्रामीणों ने अपना धरना/ प्रदर्शन स्थगित कर दिया था। मगर विभाग है कि डेढ़ वर्ष बीतने के बाद भी गहरी नींद सोया पड़ा है। मगर समझौता लागू न होने पर विभाग के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूटना स्वाभाविक है।

यह भी पढ़ें 👉  Trei ani în România: 1870-1873 | Cărți nelimitate pentru cititori

त्रुटियों के चलते रोड निर्माण में उत्पन्न हुई बाधाएं

इस रोड निर्माण में वैसे तो कई त्रुटियां सामने आई हैं,मगर एक खास त्रुटि रोड कटिंग में सामने आई है।वो ये कि भट्या गांव के नीचे यह सड़क 2 स्थानों पर पहले ऊपरी तरफ का भारी ऊँचाई वाला अत्यंत कठोर पहाड़ लगभग 290 मीटर तक काटने के बाद इसे छोड़ कर फिर निचले हिस्से को काट कर रोड निर्माण कार्य आगे बढ़ाया गया। बताते चलें कि लाखों धनराशि अनावश्यक कटिंग पर यदि मिस यूज ना हुई होती तो यह सड़क जंगल के बीच ढंगार में न रुक कर 300 मीटर आगे सालब गांव तक बन गयी होती, और ढ़ंगार से गिर कर 60 हजार रुपए के लागत वाले खच्चर की गिर कर मौत न हुई होती,साथ ही आधा दर्जन से अधिक गाँवों के ग्रामीणों को भी अबतक कुछ न कुछ सहूलियत मिलने लग गयी होती।
सड़क पर लगे पुश्ते जगह-जगह डह गये हैं,सड़क के बैंड इतने तीखे व त्रुटिपूर्ण हैं कि छोटे वाहनों को बैंड पर आगे-पीछे बैक करते हुए आगे बढाया जाता है।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के डोईवाला विधानसभा कैंप कार्यालय का उद्घाटन

जान जोखिम में डाल ढंगार से टहनियों के सहारे चलते कोई बड़ा हादसा ना हो,इसी को देखते हुए ग्रामीण महिला/पुरुषों ने श्रमदान और मनरेगा के अंतर्गत 300 मीटर पैदल/खच्चर मार्ग बनाने का संकल्प लेते हुए इन दिनों वे पैदल मार्ग निर्माण में जुटे हुए हैं। श्रमदान व मनरेगा के अंतर्गत पैदल मार्ग बनाने में जुटे महिला/ पुरुषों ने जंगल में रुकी पड़ी इस रोड को घेराधार तक निर्माण करने की मांग प्रदेश सरकार से की है। पूर्व प्रधान व सामाजिक कार्यकर्ता चतर सिंह भंडारी,कामरेड जगदीश कुलियाल, सोबन सिंह भंडारी, उमराव सिंह रावत, गैणा सिंह भंडारी, पुष्पा, धूम सिंह भंडारी,सुरेन्द्र सिंह भंडारी,गुड्डी भंडारी व उर्मिला देवी ने लोक निर्माण विभाग कार्यालय मुनिकीरेती पर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों ने समझौते का अनुपालन न करके इस पिछड़े क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ अन्याय किया है। इन ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार व शासन से जंगल में रुकी पड़ी रोड को क्षेत्र के मुख्य केंद्रीय स्थल घेराधार तक निर्माण कार्य प्रारंभ किए जाने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते हुए क्षेत्र की इस मुख्य रोड पर निर्माण कार्य शूरू न किया गया तो क्षेत्र की जनता लामबंद होकर आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

यह भी पढ़ें 👉  Saved by a Song: The Art and Healing Power of Songwriting : Download Ebook
Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

More in उत्तराखंड

उत्तराखंड

उत्तराखंड

ADVERTISEMENT

Advertisement
Advertisement

ट्रेंडिंग खबरें

To Top