Connect with us

राजकीय मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के आरोप में पांच छात्र निष्कासित…

उत्तराखंड

राजकीय मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के आरोप में पांच छात्र निष्कासित…


Uttarakhand News: कॉलेजों में रैगिंग पर लाख पाबंदियां लगें और नियम बनें लेकिन किसी न किसी फॉर्म में छात्र मानते नहीं। कॉलेजों में रैगिंग के मामले सामने आते रहते है। इसे पूरी तरह बंद करना या छात्रों पर नजर रखना मुमकिन नहीं हो रहा है। ऐसा ही मामला उत्तराखंड के हल्द्वानी से आ रहा है। बताया जा रहा है कि  यहां राजकीय मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के आरोप में पांच छात्रों को निष्कासित किया गया है। इतना ही नहीं  इन पर 25 से 30 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार जकीय मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में एक बार फिर हंगामा हो गया। सीनियर छात्रों पर जूनियर को थप्पड़ जड़ने, अभद्रता करने का आरोप है। मामले को अनुशासन कमेटी ने कार्रवाई के लिए एंटी रैगिंग कमेटी को रेफर कर दिया है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक हुई। सुबह 11 बजे से शुरू हुई बैठक शाम छह बजे तक चली। कमेटी ने एक-एक कर सभी छात्रों के बयान दर्ज किए। इसके बाद सीसीटीवी की जांच की। अन्य छात्रों से भी पूछताछ की। जिसके बाद मामले में बड़ी कार्रवाई की गई।

यह भी पढ़ें 👉  गांव-गांव पहुंच रही सरकार, कालसी-नागथात में आयोजित बहुउदेशीय शिविर

बताया जा रहा है कि कमेटी ने रैगिंग के मुख्य आरोपी 2019 बैच के मेडिकल छात्र (इंटर्न) पर 30 हजार का जुर्माना लगाया है। उसे छात्रावास से निष्कासित करने के साथ ही 15 दिन की इंटर्नशिप बढ़ा दी है। इसके अलावा रैगिंग में साथ रहे इंटर्न छात्र, 2020 बैच के छात्र व पीजी के छात्र पर 25-25 हजार का आर्थिक दंड लगाने के साथ ही हॉस्टल से बाहर कर दिया गया है। एक नर्सिंग के छात्र (डे स्कॉलर) पर 25 हजार का जुर्माना लगाया है। उसे भविष्य में हॉस्टल नहीं दिया जाएगा। सभी छात्रों को आठ मार्च तक अर्थदंड जमा करना है। इसके अलावा पांचों छात्रों के परिजनों से शपथपत्र लिया जाएगा।

यह भी पढ़ें 👉  मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने विभागों की प्रगति की समीक्षा की

गौरतलब है कि कॉलेज में पिछले पांच साल में रैगिंग के सात मामले आ चुके हैं। इंडिया में रैगिंग को लेकर कानून सख्त है।  पकड़े जाने पर जेल भी जाना पड़ सकता है और फाइन भी भरना पड़ सकता है. जानते हैं क्या कहता है इंडिया का एंटी रैगिंग कानून। भारत में रैगिंग लॉ प्रिवेंशन ऑफ रैगिंग एक्ट 1997 और इसके अमेंडमेंट्स के अंतर्गत आता है। शैक्षिक संस्थानों में रैगिंग पर रोक लगाने के लिए एक अधिनियम बनाया गया। इसके पहले और बाद में इसमें कई अमेंडमेंट हुए। साल 1999 में विश्व जागृति मिशन के तहत सुप्रीम कोर्ट ने रैगिंग को डिफाइन किया।

यह भी पढ़ें 👉  Das Geheimnis von Bahnsteig 13 - (EPUB, E-Book)
Continue Reading

More in उत्तराखंड

उत्तराखंड

उत्तराखंड

ADVERTISEMENT

Advertisement
Advertisement

ट्रेंडिंग खबरें

To Top